नई दिल्ली: दिल्ली में जमीन के सर्किल रेट में बड़े बदलाव की मांग के बीच 23 अक्टूबर को केंद्रीय आवासन एवं शहरी विकास मंत्रालय की महत्वपूर्ण बैठक होने जा रही है। दिल्ली सरकार ने भूमि की नई दरें तय करने की तैयारी की है। इस बैठक में कृषि और आवासीय भूमि के सर्किल रेट बढ़ाने के प्रस्ताव पर चर्चा होने की संभावना है। दिल्ली के किसान कृषि भूमि का सर्किल रेट बढ़ाकर 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ करने की मांग कर रहे हैं। हालांकि, दरों में कितनी वृद्धि होगी, इस पर अंतिम फैसला सरकार को लेना है।
कृषि भूमि का सर्किल रेट 53 लाख रुपये प्रति एकड़
दिल्ली में कृषि भूमि का मौजूदा सर्किल रेट 53 लाख रुपये प्रति एकड़ है, जो वर्ष 2008 से अपरिवर्तित बताया गया है। किसानों का कहना है कि पिछले कई वर्षों में महंगाई और जमीन की कीमतों में वृद्धि के बावजूद सरकारी दरों में बदलाव नहीं हुआ है। इसलिए कृषि भूमि के सर्किल रेट में व्यापक संशोधन किया जाना चाहिए। किसानों की ओर से जमीन की सरकारी दर बढ़ाकर 8.5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक करने की मांग उठाई गई है। यदि इस मांग को स्वीकार किया जाता है, तो मौजूदा दर की तुलना में यह बहुत बड़ी वृद्धि होगी। हालांकि, 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की दर अभी केवल मांग है, इसे स्वीकृत सरकारी दर नहीं माना जाना चाहिए।
आवासीय जमीन की दरों में भी बदलाव संभव
दिल्ली में आवासीय संपत्तियों के सर्किल रेट में वर्ष 2014 के बाद से बदलाव नहीं होने की जानकारी दी गई है। सरकार अब विभिन्न इलाकों की स्थिति, संपत्तियों के प्रकार और स्थानीय परिस्थितियों को ध्यान में रखकर दरों की समीक्षा कर रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार, आवासीय संपत्तियों के सर्किल रेट में अलग-अलग क्षेत्रों के आधार पर 10 से 40 प्रतिशत तक वृद्धि की संभावना जताई जा रही है। वहीं, कृषि भूमि के लिए ढाई करोड़ से 5 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक की दरों पर विचार किए जाने की चर्चा है। हालांकि, ये संभावित दरें हैं और अंतिम निर्णय के बाद ही स्पष्ट होगा कि किन क्षेत्रों में कितनी वृद्धि लागू की जाएगी।
किसानों से लेकर आरडब्ल्यूए तक मांगे गए थे सुझाव
दिल्ली में सर्किल रेट की समीक्षा के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने जून 2025 में मंडलायुक्त की अध्यक्षता में एक समिति गठित की थी। समिति को आवासीय और कृषि भूमि की मौजूदा दरों की समीक्षा कर संशोधन संबंधी सुझाव देने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। समिति की सिफारिशों के आधार पर दिल्ली सरकार ने अक्टूबर 2025 के पहले सप्ताह में आम जनता, आवासीय कल्याण संघों और किसानों से सुझाव तथा आपत्तियां आमंत्रित की थीं। इसके लिए 15 दिनों का समय दिया गया था, जिसकी अंतिम तिथि 15 अक्टूबर 2025 थी। समिति अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंप चुकी है। इस विषय पर सरकार के स्तर पर कई बैठकें भी हो चुकी हैं। अब प्रस्तावित केंद्रीय बैठक में आगे की प्रक्रिया और संभावित दरों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
दिल्ली के 200 से अधिक गांवों में खेती
दिल्ली में 200 से अधिक गांवों में खेती होने की जानकारी दी गई है। जानकारों के अनुसार, राजधानी में 50 हजार एकड़ से अधिक भूमि पर कृषि गतिविधियां जारी हैं। ऐसे में कृषि भूमि के सर्किल रेट में बदलाव का असर बड़ी संख्या में किसानों और ग्रामीण परिवारों पर पड़ सकता है। किसानों का तर्क है कि मौजूदा दरें लंबे समय से नहीं बढ़ने के कारण उनकी जमीन का सरकारी मूल्यांकन वास्तविक आर्थिक परिस्थितियों के अनुरूप नहीं रह गया है। वे चाहते हैं कि कृषि भूमि के साथ गांवों की आवासीय भूमि की दरों की भी समीक्षा की जाए, ताकि ग्रामीण परिवारों की संपत्ति का सरकारी मूल्यांकन बेहतर हो सके। सरकार के समक्ष कृषि भूमि के सर्किल रेट को 5 करोड़ से 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ तक करने के सुझाव भी रखे गए हैं। अंतिम दर तय करते समय इन सुझावों के साथ अलग-अलग क्षेत्रों की परिस्थितियों पर विचार किया जा सकता है।
किसानों ने 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ मांग दोहराई
सेंटर फॉर यूथ कल्चर, लॉ एंड एनवायरमेंट के संस्थापक पारस त्यागी ने कहा कि दिल्ली के किसानों के साथ लंबे समय से अन्याय हो रहा है। उनका कहना है कि वर्ष 2008 से कृषि भूमि के सर्किल रेट नहीं बढ़ाए गए, जबकि इस दौरान महंगाई में काफी वृद्धि हुई है। त्यागी के अनुसार, कृषि भूमि का सर्किल रेट 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ से कम नहीं होना चाहिए। किसानों की मांग है कि नई दरें तय करते समय उनकी आर्थिक स्थिति, जमीन के मौजूदा मूल्य और पिछले वर्षों में हुए बदलावों को ध्यान में रखा जाए।
सर्किल रेट बढ़ने से क्या होगा असर?
सर्किल रेट वह न्यूनतम सरकारी मूल्य है, जिसका उपयोग जमीन और संपत्ति के पंजीकरण के दौरान स्टांप शुल्क तथा पंजीकरण शुल्क की गणना में किया जाता है। कई मामलों में यह संपत्ति के लेन-देन के मूल्यांकन का महत्वपूर्ण आधार होता है। यदि दिल्ली में सर्किल रेट बढ़ाए जाते हैं, तो जमीन की रजिस्ट्री पर लगने वाला खर्च भी बढ़ सकता है। दूसरी ओर, जमीन के सरकारी मूल्यांकन में वृद्धि से उन किसानों और संपत्ति मालिकों को लाभ हो सकता है, जिनकी भूमि का मूल्यांकन लंबे समय से कम दरों पर किया जा रहा है। हालांकि, वास्तविक प्रभाव इस बात पर निर्भर करेगा कि सरकार नई दरें कितनी तय करती है, वे किन क्षेत्रों पर लागू होती हैं और संबंधित नियमों में क्या प्रावधान किए जाते हैं।
23 अक्टूबर की बैठक पर टिकी सबकी नज़रे
दिल्ली में कृषि और आवासीय भूमि के सर्किल रेट में संशोधन को लेकर लंबे समय से चर्चा चल रही है। किसानों की मांग है कि नई दरें तय करते समय उनके हितों को प्राथमिकता दी जाए, जबकि आवासीय संपत्ति के मालिक भी सरकारी मूल्यांकन में बदलाव का इंतजार कर रहे हैं। अब 23 अक्टूबर की बैठक में होने वाली चर्चा महत्वपूर्ण मानी जा रही है। हालांकि, बैठक के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि सरकार किसानों की 10 करोड़ रुपये प्रति एकड़ की मांग पर क्या रुख अपनाती है और कृषि तथा आवासीय भूमि के लिए नई दरों को लेकर क्या निर्णय लिया जाता है।