फ़र्ज़ी वकीलों और फ़र्ज़ी लाँ डिग्री पर सुप्रीम कोर्ट हुई सख़्त, केंद्र सरकार, सीबीआई और बीसीआई को नोटिस जारी

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने फ़र्ज़ी वकीलों और फ़र्ज़ी लॉ डिग्री, दूसरे व्यक्ति के नाम पर वकालत करने और कानूनी पेशे में गिरते पेशेवर मानकों की स्वतंत्र जांच की मांग वाली याचिका पर संबंधित पक्षों को नोटिस जारी किया है। मंगलवार को सीजेआई सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्य बागची और जस्टिस वी. मोहना की खंडपीठ ने केंद्र सरकार, इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय, बार काउंसिल ऑफ इंडिया और सीबीआई को नोटिस जारी किया।


यह याचिका अधिवक्ता राजा चौधरी ने दायर की है। केस राजा चौधरी v. यूनियन ऑफ़ इंडिया डायरी संख्या. 32981/2026 है। इसमें फर्जी वकीलों और फर्जी लॉ डिग्री से जुड़े मामलों की जांच सीबीआई या किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से कराने की मांग की गई है। याचिका में इलाहाबाद हाईकोर्ट के मोहम्मद कफ़ील vs स्टेट ऑफ़ उत्तर प्रदेश फैसले का भी हवाला दिया गया है, जिसमें कानूनी पेशे के अपराधीकरण और फर्जी वकीलों की समस्या पर चर्चा की गई थी।


आपको बता दें याचिका में सोशल मीडिया पर सामने आए “कॉकरोच जनता पार्टी” नामक व्यंग्यात्मक ऑनलाइन अभियान से जुड़ी गतिविधियों की जांच की मांग भी की गई है। याचिकाकर्ता के अनुसार, सीजेआई की कोर्ट में की गई मौखिक टिप्पणियों को संदर्भ से अलग करके मीम्स, वायरल कंटेंट और व्यावसायिक सामग्री के रूप में प्रसारित किया गया। याचिका में आरोप लगाया गया है कि कोर्ट की कार्यवाही और मौखिक टिप्पणियों का संगठित व्यावसायिक इस्तेमाल, ट्रेडमार्क कमर्शियलाइजेशन और मुद्रीकरण न्यायपालिका की गरिमा तथा सार्वजनिक विश्वास से जुड़ा गंभीर मुद्दा हो सकता है।


याचिका में बीसीआई चेयरपर्सन के उस कथित बयान का भी उल्लेख किया गया है, जिसमें करीब 35–40% वकीलों के फर्जी होने की बात कही गई थी। हालांकि, इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने अभी केवल संबंधित पक्षों से जवाब मांगा है और आगे की कार्रवाई उनके जवाब तथा न्यायालय के विचार के बाद तय की जाएगी। इस मामले की अगली सुनवाई 10 सितंबर को निर्धारित की गई है।

अन्य खबरें